महिला विशेष कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Women Focused in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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Featured Books
  • लाल दाग़ - 4

    मैडम ने अपने बैग में देखा कि अगर उनके पास पैड हो तो वे सुधा को दे दें, लेकिन आज...

  • त्रिशा... - 35

    बीती रात की यादों के सजीव होते ही त्रिशा के मन में कड़वाहट भर गई। वह खुद के लिए...

  • सीमाओं से परे

    “राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी...

दो पतियों की लाडली पत्नी - 9 By Sonam Brijwasi

अगली सुबह, हल्की धूप परदे से अंदर आ रही है।कमरा बिल्कुल शांत है।Shreya धीरे-धीरे आँखें खोलती है… सिर भारी है पर अब दर्द उतना नहीं।वो उठकर बैठती है और सामने का नज़ारा देखकर उसकी आँख...

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मेरे दूल्हे को मरना होगा - अध्याय 7: निष्कर्ष By Varun

रसोई में चाय उबल रही थी। रश्मि अदरक कूट रही थी और सौम्या कप ट्रे में सजा रही थी। भाप और दूध की गंध में एक घरेलू-सा सुकून था—जैसे सब ठीक हो। सौम्या ट्रे उठाकर बाहर आई। ड्रॉइंग रूम र...

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लाल दाग़ - 4 By ARTI MEENA

मैडम ने अपने बैग में देखा कि अगर उनके पास पैड हो तो वे सुधा को दे दें, लेकिन आज उनके बैग में पैड नहीं था। अब मैडम समझ नहीं पा रही थीं कि क्या करें। उधर सुधा रो-रोकर और शर्म के कारण...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 2 By Jyoti Prajapati

सुबह की सुनहरी धूप अब तीखी होने लगी थी। भूपेंद्र के ऑफिस जाने के बाद घर की हलचल थमी नहीं थी, बल्कि उसका स्वरूप बदल गया था। वंशिका अपने कमरे में शीशे के सामने खड़ी थी। वह अपनी फिटने...

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त्रिशा... - 35 By vrinda

बीती रात की यादों के सजीव होते ही त्रिशा के मन में कड़वाहट भर गई। वह खुद के लिए बहुत हीन सा महसूस करने लगी। खैर जो भी हो यह सिंदूर तो उसे लगाना ही था। त्रिशा ने सिंदूर लगाया और सिर...

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सीमाओं से परे By ARTI MEENA

“राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी की रफ्तार है… पर मैं अब 25 की नहीं रही… थोड़ा साथ चल ले।”आज माँ राधा को साथ लेकर बाज़ार आई थी।कुछ ही...

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अनजान मददगार-The Stranger By fiza saifi

माया अपनी नाइट शिफ्ट पूरी करके कॉल सेंटर से निकली थी। नाइट शिफ्ट का ड्राइवर कैब के साथ बाहर उसका इंतज़ार कर रहा था। नाइट शिफ्ट में कॉल सेंटर की तरफ़ से ड्रॉप सर्विस मिलती थी और एक...

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नीलम : एक नाम, कई फैसले By ARTI MEENA

गांव में सुबहें अक्सर शोर से नहीं, खबरों से शुरू होती हैं।उस दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ।माँ की आवाज़ में एक अजीब-सा ठहराव था जब उन्होंने कहा—“सुना है, मोहल्ले की लड़की… भाग गई है।”गांव...

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जीवन की पहचान : रीमा By Shivani Jatinkumar Pandya

रीमारीमा… फैशन की दुनिया में यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं था। अंतरराष्ट्रीय फैशन शो, नामी ब्रांड्स, विदेशी मैगज़ीनों के कवर—सब जगह उसकी डिज़ाइनों की चर्चा थी। लोग कहते थे, “रीम...

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कोख का संघर्ष By Jeetendra

भाग 1: विश्वास की दरारसुहानी खिड़की के पास खड़ी बाहर गिरती बारिश की बूंदों को देख रही थी, लेकिन उसका ध्यान बाहर के मौसम पर नहीं, बल्कि अपने हाथ में पकड़ी उस स्ट्रिप पर था जिस पर दो...

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इस घर में प्यार मना है - 6 By Sonam Brijwasi

आधी रात हो चुकी थी। पूरा घर गहरी नींद में था।सन्नाटा इतना गहरा कि कार्तिक के कदमों की आहट उसे खुद ही चुभ रही थी। उसके हाथ में एक पुरानी लोहे की रॉड थी। दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था...

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कलाकृति By Raj Phulware

कलाकृतिलेखक राज फुलवरे(द फाइल नंबर 22)PART 1 : फाइलों की दुनियावैशाली नगर पुलिस स्टेशन मुंबई की उन इमारतों में से एक था, जहाँ बाहर से देखने पर कुछ खास नहीं लगता, लेकिन अंदर कदम रखत...

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घूरा पर उगा पौधा..? By softrebel

शरीर पर लगे घाव तो भरने के लिए ही होते हैं,किंतु मन पर लगे घाव शरीर को भीतर से खोखला कर देते हैं।यही कारण है कि मन के घाव, सतही घावों को भरने नहीं देते।खोखला शरीर, शिथिल मन और दर्द...

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अदृश्य श्रम: घर के काम को काम क्यों नहीं माना जाता? By kajal

सुबह की शुरुआत अक्सर दूसरों के लिए होती है।अलार्म से पहले जागना, सबके उठने से पहले चाय रखना, बच्चों के स्कूल की तैयारी, घर के कामों की सूची मन ही मन बनाना — यह सब बिना किसी शोर के...

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कांदेपोहे By Raj Phulware

कांदेपोहेलेखक : राज फुलवरेशहर की भीड़भाड़ भरी जिंदगी में, जहाँ हर कोई अपनी जल्दी में, अपनी चिंताओं में डूबा हुआ भागता रहता है, उसी सड़क के एक कोने पर एक छोटी-सी गाड़ी रोज़ सुबह सज...

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बदलते समाज में गृहिणी की भूमिका और उसकी चुनौतियाँ By kajal

आज की गृहिणी की ज़िंदगी विज्ञान और आधुनिक सुविधाओं के कारण जितनी आसान दिखाई देती है, उतनी ही समय के साथ जटिल भी होती जा रही है। वॉशिंग मशीन, गैस, मिक्सर और इंटरनेट जैसी सुविधाओं ने...

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चंदेला - 3 By Raj Phulware

चंदेला — भाग 3लेखक: राज फुलवरेतीसरा पाठ — प्रकाश की जिम्मेदारीकांता अब केवल एक नाम नहीं रही थी। वह एक प्रतीक बन चुकी थी — एक ऐसी लौ, जो अंधेरे में उगी थी और आँधियों के बावजूद बुझी...

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सरोगेसी का काला पक्ष By S Sinha

                                                          सरोगेसी का काला पक्षसरोगेसी क्या है? सरोगेसी वह मेडिकल क्रिया है जिसमें एक महिला गर्भधारण करती है और जन्म के बाद बच्चे को...

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दो दिल, एक धड़कन: सृष्टि का सबसे सुंदर चमत्कारक्या By Zalri

आपने कभी सोचा है कि "पूर्णता" का असली अर्थ क्या है? दुनिया की नज़र में पूर्णता बड़ी गाड़ियों, ऊंचे पदों या भौतिक सुखों में हो सकती है, लेकिन एक स्त्री के लिए पूर्णता का अर्...

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तपस्विनी By Raj Phulware

तपस्विनीलेखक राज फुलवरेदिशाएँ उस दिन असामान्य रूप से शांत थीं. सूर्य ढलने को था, पर उसकी किरणें जंगल के विस्तृत फलों, लताओं और अनगिनत पत्तों पर ऐसा बिखर रही थीं जैसे पूरा वन सोने क...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 9 By Sonam Brijwasi

अगली सुबह, हल्की धूप परदे से अंदर आ रही है।कमरा बिल्कुल शांत है।Shreya धीरे-धीरे आँखें खोलती है… सिर भारी है पर अब दर्द उतना नहीं।वो उठकर बैठती है और सामने का नज़ारा देखकर उसकी आँख...

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मेरे दूल्हे को मरना होगा - अध्याय 7: निष्कर्ष By Varun

रसोई में चाय उबल रही थी। रश्मि अदरक कूट रही थी और सौम्या कप ट्रे में सजा रही थी। भाप और दूध की गंध में एक घरेलू-सा सुकून था—जैसे सब ठीक हो। सौम्या ट्रे उठाकर बाहर आई। ड्रॉइंग रूम र...

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लाल दाग़ - 4 By ARTI MEENA

मैडम ने अपने बैग में देखा कि अगर उनके पास पैड हो तो वे सुधा को दे दें, लेकिन आज उनके बैग में पैड नहीं था। अब मैडम समझ नहीं पा रही थीं कि क्या करें। उधर सुधा रो-रोकर और शर्म के कारण...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 2 By Jyoti Prajapati

सुबह की सुनहरी धूप अब तीखी होने लगी थी। भूपेंद्र के ऑफिस जाने के बाद घर की हलचल थमी नहीं थी, बल्कि उसका स्वरूप बदल गया था। वंशिका अपने कमरे में शीशे के सामने खड़ी थी। वह अपनी फिटने...

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सीमाओं से परे By ARTI MEENA

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नीलम : एक नाम, कई फैसले By ARTI MEENA

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इस घर में प्यार मना है - 6 By Sonam Brijwasi

आधी रात हो चुकी थी। पूरा घर गहरी नींद में था।सन्नाटा इतना गहरा कि कार्तिक के कदमों की आहट उसे खुद ही चुभ रही थी। उसके हाथ में एक पुरानी लोहे की रॉड थी। दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था...

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अदृश्य श्रम: घर के काम को काम क्यों नहीं माना जाता? By kajal

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कांदेपोहेलेखक : राज फुलवरेशहर की भीड़भाड़ भरी जिंदगी में, जहाँ हर कोई अपनी जल्दी में, अपनी चिंताओं में डूबा हुआ भागता रहता है, उसी सड़क के एक कोने पर एक छोटी-सी गाड़ी रोज़ सुबह सज...

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चंदेला - 3 By Raj Phulware

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तपस्विनीलेखक राज फुलवरेदिशाएँ उस दिन असामान्य रूप से शांत थीं. सूर्य ढलने को था, पर उसकी किरणें जंगल के विस्तृत फलों, लताओं और अनगिनत पत्तों पर ऐसा बिखर रही थीं जैसे पूरा वन सोने क...

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