महिला विशेष कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Women Focused in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • खोंटा सिक्का

    शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर...

  • दो पतियों की लाडली पत्नी - 24

    Shreya सोफे पर अकेली बैठी थी।उसके चेहरे पर आँसू सूखते-सूखते फिर बह जाते।कमरा पहल...

  • तपती दोपहरी

    तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बा...

पंछी का पिंजरा - भाग 3 By Anil Kundal

दारुण बिलाव के सम्मुख जैसे कि निरीह कपोत स्वयं को  असहाय सा अनुभव करता है,ठीक वैसे ही उस समय मेरी दशा थी। मेरी हिम्मत मेरे भीतर ही भीतर दम तोड़ती हुई महसूस हो रही थी। मैं लाख चाहने...

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 21 By Sonam Brijwasi

तांत्रिक जैसे ही तलवार शानवी की ओर उठाने वाला था…पूरा कमरा सन्न हो गया। लेकिन तभी—एक तेज़, गूंजती हुई आवाज़ आई—रुक जाओ!सभी की नज़र पीछे मुड़ी। दरवाज़े पर खड़ा था… कार्तिकेय। उसकी...

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खोंटा सिक्का By Alok Mishra

शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर सिगरेट की तलब में नीचे चौराहे पर गुमटी तक आया। एक सिगरेट जला कर खुद को हलका और गर्म महसूस करने लगा।...

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त्रिशा... - 47 By palvisha

"त्रिशा.........." "जल्दी कर लो ना यार!!!!!!! आधे दिन की ही छुट्टी मेरी!!!!!!! जल्दी चलो ना!!!!!!" बाहर से आते राजन की तेज आवाज ने त्रिशा को उसके ख्यालों से जगाया और वह अपने विचार...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 24 By Sonam Brijwasi

Shreya सोफे पर अकेली बैठी थी।उसके चेहरे पर आँसू सूखते-सूखते फिर बह जाते।कमरा पहले जैसा नहीं था…ना वही गर्माहट, ना वही हँसी।तभी—उसके फोन पर एक टन की आवाज़ आई।वह चौंककर उठी।फोन में उ...

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जंगल - 38 By Neeraj Sharma

--------------उलझन (3) जगल पस्तक मे दर्ज किया गया है... जो ये जानता है कि रास्ते खुद बे खुद बन जाते है। फिर काफ़ले निकल पड़ते है।                         जैसे साप दृष्टि मित्र  झपकनी...

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तपती दोपहरी By prem chand hembram

तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बाहर निकलने से भी कतराते हैं।पुराने बाज़ार के एक कोने में राजू अपनी रिक्शा लेकर खड़ा था।सामने सत्तू की...

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ममता ...एक अनुभूति... - 5 By kalpita

थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममत...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग) By Jyoti Prajapati

ये मेरी चार साल पुरानी रचना थी। जिसे मैने तब पब्लिश नहीं किया था क्योंकि लैपटॉप खराब हो गया था। उस समय मेरी ज्यादातर कहानियां फैमिली पर ही होती थी। शहर की चकाचौंध से दूर, उस पुराने...

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सपनों की डोली। - 5 By softrebel

__मौन के पार से आई खबर___बच्चों के मन में उत्पन्न सवालों को नारायणी अक्सर इधर उधर की बातें कर टालने का प्रयास करती।नारायण के बिन पहले कुछ दिन बीते, फिर सप्ताह और महीने...धीरे-धीरे...

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चण्डी-दल By कमल चोपड़ा

चण्डी-दलकमल चोपड़ा​बंसी पानवाले से लेकर अमर टेलर तक और शामलाल सब्जीवाले की रेहड़ी से कमेटी के नल तक लोकपुरी में एक ही चर्चा थी—कल रात को दो-तीन औरतों ने रामरतन को बुरी तरह धुन के रख...

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दोष बताओ By कमल चोपड़ा

​दोष बताओकमल चोपड़ा​पति के माथे पर बल पड़ गये थे, "महिलाएँ तो हमारे ऑफिस में भी हैं। छेड़ना तो दूर उनसे मजाक करने की भी हिम्मत कोई नहीं कर सकता। जो ज्यादा चालू हो... चालाक बने या न...

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पति परमेश्वर ऐप। By Jeetendra

आजकल विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है। उसने चाँद पर बसने के रास्ते खोज लिए हैं। इंसान ने ऐसी मशीनें बना ली हैं जो पलक झपकते ही सारा काम कर देती हैं। लेकिन भारतीय पति के दिमाग को समझ...

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मुजरिम By कमल चोपड़ा

​मुजरिमकमल चोपड़ा​शोर-शराबा तो ऐसे मचा था जैसे कोई जीता-जागता आतंक गाँव में घुस आया हो, अपना-अपना काम वहीं छोड़कर बच्चे-बूढ़े बाहर निकल पड़े थे, देखा तो सामने से एक अधबूढ़ा-सा आदमी च...

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भारतीय नारी : सृष्टि की उद्घाता By prem chand hembram

भारतीय नारी: सृष्टि, संस्कार और संतुलन की आधारशिलाभारत की पुण्यभूमि पर नारी को सदैव “माँ” का सर्वोच्च स्थान दिया गया है।जिस प्रकार यह धरती सम्पूर्ण सृष्टि की जननी है, उसी प्रकार एक...

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संस्कारों की डिग्री। By Jeetendra

शहर के मुख्य चौराहे पर एक बहुत बड़ा होर्डिंग लगा था। उस पर लिखा था कि अब लड़कियों को भटकने की जरूरत नहीं है। परम पावन भारतीय संस्कार यूनिवर्सिटी खुल चुकी है। यहाँ डिग्री केवल पढ़ाई की...

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लड़की की लिमिट। By Jeetendra

हमारे मोहल्ले में हर घर के दरवाजे पर एक अदृश्य लक्ष्मण रेखा खिंची होती है। इसे सिर्फ लड़कियां ही देख पाती हैं। दयाशंकर जी इस रेखा के सबसे बड़े और निष्ठावान चौकीदार हैं। उनकी बेटी ग...

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टूटा-सा कोई दरवाजा By कमल चोपड़ा

​टूटा-सा कोई दरवाजा​रात काफी हो गयी थी। आसपास की झुग्गियों से खड़कते हुए बरतनों, बिलबिलाते हुए बच्चों, कलपती हुई बुढ़ियों, खाँसते-खँखारते हुए बूढ़ों, झींकती हुई स्त्रियों और शराब के...

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ज़ख्मों की शादी - 12 By Sonam Brijwasi

Past Timeसृष्टि ने ये बात कबीर को बताते हुए जैसे अपनी पूरी हिम्मत समेट ली थी। आवाज़ काँप रही थी, आँखें झुकी हुई थीं।सृष्टि  बोली - क… कबीर जी… मैं… मैं प्रेग्नेंट हूँ।कमरे में सन्न...

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पंछी का पिंजरा - भाग 3 By Anil Kundal

दारुण बिलाव के सम्मुख जैसे कि निरीह कपोत स्वयं को  असहाय सा अनुभव करता है,ठीक वैसे ही उस समय मेरी दशा थी। मेरी हिम्मत मेरे भीतर ही भीतर दम तोड़ती हुई महसूस हो रही थी। मैं लाख चाहने...

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तांत्रिक जैसे ही तलवार शानवी की ओर उठाने वाला था…पूरा कमरा सन्न हो गया। लेकिन तभी—एक तेज़, गूंजती हुई आवाज़ आई—रुक जाओ!सभी की नज़र पीछे मुड़ी। दरवाज़े पर खड़ा था… कार्तिकेय। उसकी...

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खोंटा सिक्का By Alok Mishra

शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर सिगरेट की तलब में नीचे चौराहे पर गुमटी तक आया। एक सिगरेट जला कर खुद को हलका और गर्म महसूस करने लगा।...

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त्रिशा... - 47 By palvisha

"त्रिशा.........." "जल्दी कर लो ना यार!!!!!!! आधे दिन की ही छुट्टी मेरी!!!!!!! जल्दी चलो ना!!!!!!" बाहर से आते राजन की तेज आवाज ने त्रिशा को उसके ख्यालों से जगाया और वह अपने विचार...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 24 By Sonam Brijwasi

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जंगल - 38 By Neeraj Sharma

--------------उलझन (3) जगल पस्तक मे दर्ज किया गया है... जो ये जानता है कि रास्ते खुद बे खुद बन जाते है। फिर काफ़ले निकल पड़ते है।                         जैसे साप दृष्टि मित्र  झपकनी...

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तपती दोपहरी By prem chand hembram

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ममता ...एक अनुभूति... - 5 By kalpita

थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममत...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग) By Jyoti Prajapati

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चण्डी-दल By कमल चोपड़ा

चण्डी-दलकमल चोपड़ा​बंसी पानवाले से लेकर अमर टेलर तक और शामलाल सब्जीवाले की रेहड़ी से कमेटी के नल तक लोकपुरी में एक ही चर्चा थी—कल रात को दो-तीन औरतों ने रामरतन को बुरी तरह धुन के रख...

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दोष बताओ By कमल चोपड़ा

​दोष बताओकमल चोपड़ा​पति के माथे पर बल पड़ गये थे, "महिलाएँ तो हमारे ऑफिस में भी हैं। छेड़ना तो दूर उनसे मजाक करने की भी हिम्मत कोई नहीं कर सकता। जो ज्यादा चालू हो... चालाक बने या न...

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पति परमेश्वर ऐप। By Jeetendra

आजकल विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है। उसने चाँद पर बसने के रास्ते खोज लिए हैं। इंसान ने ऐसी मशीनें बना ली हैं जो पलक झपकते ही सारा काम कर देती हैं। लेकिन भारतीय पति के दिमाग को समझ...

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​मुजरिमकमल चोपड़ा​शोर-शराबा तो ऐसे मचा था जैसे कोई जीता-जागता आतंक गाँव में घुस आया हो, अपना-अपना काम वहीं छोड़कर बच्चे-बूढ़े बाहर निकल पड़े थे, देखा तो सामने से एक अधबूढ़ा-सा आदमी च...

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भारतीय नारी : सृष्टि की उद्घाता By prem chand hembram

भारतीय नारी: सृष्टि, संस्कार और संतुलन की आधारशिलाभारत की पुण्यभूमि पर नारी को सदैव “माँ” का सर्वोच्च स्थान दिया गया है।जिस प्रकार यह धरती सम्पूर्ण सृष्टि की जननी है, उसी प्रकार एक...

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टूटा-सा कोई दरवाजा By कमल चोपड़ा

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